असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है विजयादशमी

भारत में हर त्यौहार प्रेम व बडे उल्लास के साथ मनाया जाता है। इन त्यौहार में दशहरा भी एक प्रमुख त्यौहार माना गया है जिसे विजयादशमी भी कहा जाता है। यह अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है।

मुहूर्त-2018

तिथि समय
विजय मुहूर्त 13:58 से 14:43
अपराह्न पूजा समय 13:13 से 15:28
दशमी तिथि आरंभ 15:28, 18 अक्टूबर
दशमी तिथि समाप्त 17:57, 19 अक्टूबर

दशहरा का महत्व— हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार इस दिन भगवान श्री राम ने अहंकारी रावण को मार गिराया था और इसी दिन देवी दुर्गा ने युद्व के बाद महिषासुर का भी वध किया था। इसलिए यह त्यौहार असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है।

  • भारत में इस दिन लोग शस्त्रों की पूजा करते हैं और नया कार्य,व्यवसाय भी प्रारंभ करते हैं।
  • माना जाता है कि इस दिन शुरू किए जाने वाले नए कार्य में विजय ही मिलती है।
  • इस दिन रावण का विशाल पुतला बना कर जलाया भी जाता है।
  • दशहरा को भगवान राम की विजय व देवी दुर्गा की पूजा के रूप में मनाया जाता है और यह एक प्रकार से शक्ति पूजा का पर्व ही है।
  • विजयदशमी का यह पावन पर्व लोगों को काम,क्रोध,लोभ,मोह,अहंकार,आलस्य,हिंसा आदि बुराईयां जीवन से त्यागने की भी प्रेरणा देता है।
  • पश्चिम बंगाल,त्रिपुरा आदि राज्यों में इस दिन दुर्गा पूजा के बडे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
  • ऐसा मान्यता है कि आश्विन शुक्ल दशमी को तारा उदय होने के समय 'विजय' नामक मुहूर्त होता है। यह काल सर्वकार्य सिद्धिदायक भी माना गया है। इस वजह से इसे विजयादशमी कहते हैं।
  • शत्रु पर विजय पाने के लिए इसी दिन प्रस्थान करना चाहिए। इस दिन श्रवण नक्षत्र का योग और भी अधिक शुभ माना गया है।

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