ज्योतिष के अनुसार शादी से पहले वर व वधु की कुंडली का मिलान आवश्यक होता है और कुंडली मिलान से ही दोनों के शादी बाद जीवन के बारे में अंदाजा लगाया जा सकता है। आइए आपको बता दे कि वर व वधु के कुंडली मिलान के वक्त क्या क्या बातें महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं-
- कुंडली मिलान को गुण मिलान, लग्न मेल आदि नाम से भी जाना जाता है।
- इसमें गुण मिलान व मांगलिक दोष पर विचार किया जाता है।
- वर व वधु की जन्म कुंडली अर्थात् जन्मपत्री को आधार मान कर ही कुंडली का मिलान किया जाता है।
- कुंडली मिलान के दौरान मुख्य रूप से अष्टकूटों का मिलान किया जाता है।
- वर्ण,नक्षत्र,योनी,ग्रह मैत्री,गण,भटकूट व नाडी अष्टकूट होते हैं।
- वर्ण में वर वधु के अहंकार का मिलान किया जाता है।
- वष्य में यह देखा जाता है कि शादी के बाद कौन किस पर स्वभाव में हावी रहेगा।
- नक्षत्र में वर व वधु के स्वास्थ्य जीवन को देखा जाता है।
- योनि में वर व वधु के बीच निकटता को देखा जाता है।
- गृह मैत्री में दोनों के बीच आपसी प्रेम व्यवहार व मित्रता गुण को मिलाया जाता है।
- गण में वर व वधु के स्वभाव को देखा जाता है।
- भटकुट में दोनों पक्षों की भावनाओं को देखा जाता है।
- नाडी से भावी दंपत्ति की मानसिकता व मनोदशा का मूल्यांकन किया जाता है।
- अष्टकूट में कुल 36 गुण होते हैं और वर व वधु के जितने गुण मिलेंगे शादी उतनी ही सफल मानी जावेगी।
- अगर 18 से कम गुण मिलते हैं तो शादी योग्य नहीं माना जाता है।
- 18 से 24 के बीच गुण मिलने पर सामान्य माना जाता है।
- 24 से 32 के बीच गुण मिलते है तो उत्तम माना जाएगा। लेकिन इन सबके बीच अगर पूरे 36 गुण मिल जाए तो भी एक तरह से इसे ठीक नहीं माना जाता है।
- कुंडली में सबसे महत्वपूर्ण मांगलिक दोष होता है जिस पर शादी से पहले जरूर विचार किया जाना चाहिए और अगर मांगलिक दोष हो तो दूर करने के उपाय करने चाहिए।
- इसके अलावा कुंडली में नाडी दोष भी महत्वपूर्ण होता है इसके लिए जरूरी उपाय करने चाहिए।