जानें, कब और क्यों मनाया जाती है नाग पंचमी

हिन्दू धर्म में नागपंचमी पर्व का विशेष महत्व माना गया है। यह श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पूरे भारत में श्रद्वा के साथ मनाया जाता है। दरअसल सावन के माह में बारिश के दौरान जब सांप बिलों से निकल कर बाहर धरती पर आ जाते हैं और वो किसी को हानि न पहुंचाएं इसलिए नाग पंचमी के दिन इनकी पूजा की जाती है और दूध भी पिलाया जाता है।

मुहूर्त-2018

तिथि समय
पूजा मुहूर्त 05:55 से 8:31 (15 अगस्त)
पंचमी तिथि प्रारंभ 03:27 (15 अगस्त)
पंचमी तिथि समाप्ति 01:51 (16 अगस्त)

यह है पौराणिक कहानी— पुरानी मान्यता है कि इस दिन श्री कृष्ण ने गोकुलवासियों को कालिया नामक नाग के आतंक से बचाया था। जब एक दिन बाल रूप में कृष्ण अपने मित्रों के साथ यमुना तट पर खेल रहे थे। इस दौरान उनकी गेंद नदी में जा गिरी थी। गेंद बाहर निकालने के दौरान उसी समय कालिया ने श्री कृष्ण पर आक्रमण कर दिया। किन्तु कालिया की जान पर बन आई और कालिया ने उनसे क्षमा याचना मांगी। कृष्ण ने कालिया से पहले यह प्रतिज्ञा ली कि वह कभी भी गाँव वालों को परेशान नहीं करेगा इसके बाद ही उन्होंने कालिया को छोड़ दिया। नाग कालिया पर कृष्णा की विजय के बाद से ही इस दिन को नाग पंचमी के रूप में पूरे भारत वर्ष में श्रद्धा भक्ति से मनाया जाता है।

नागपंचमी पर पूजा विधि — इस दिन सुबह जल्दी उठ कर व स्नान आदि से निवृत्त होकर नागदेवता की तस्वीर या मिट्टी से बनी उनकी प्रतिमा के सामने दूध, धान, खील और दूब घास चढाई जाती है और नागदेवता की पूजा की जाती हैं।

  • उपवास करने वाले व्यक्तियों को सांयकाल को भूमि की खुदाई कभी न करनी चाहिए।
  • कुंडली के दोषों में कालसर्प दोष एक बहुत ही महत्वपूर्ण दोष होता है। इस दोष से मुक्ति के लिये भी ज्योतिषाचार्य नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने के साथ-साथ दान दक्षिणा का महत्व बताते हैं।
  • शास्त्रों के अनुसार नाग भगवान शिव के गले के हार माना गया हैं और भगवान विष्णु की शैय्या भी है।
  • इसलिए हिन्दू धर्म में नागपंचमी का त्यौहार विशेष श्रद्वा भाव के साथ मनाया जाता है।

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