इस वजह से विवाह के दौरान सबसे महत्वपूर्ण रस्म है कन्यादान

हिन्दू धर्म में विवाह को महत्वपूर्ण संस्कार माना है और इसके बाद पति-पत्नी के नए जीवन की शुरूआत होती है। विवाह के दौरान कई रस्में निभाई जाती है जिनका अपना अलग महत्व होता है। लेकिन कन्यादान को विवाह में सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। आखिर क्यों जरूरी है कन्यादान व किस तरह संपन्न होता है यह संस्कार,जानिए

  • हिन्दू धर्म में कन्या को देवी लक्ष्मी के समान माना गया है और वर को भगवान विष्णु समान माना जाता है।
  • शादी के दौरान जब कोई पिता अपनी पुत्री के हाथ को वर को सौंपता है तो इसका मतलब यह है कि वर लक्ष्मी समान पुत्री को अपने घर पर प्रेम व सम्मान के साथ रखेगा।
  • मान्यता है कि अगर इस तरह धर्म,शास्त्र अनुसार पिता अपनी पुत्री का कन्यादान करें तो पिता के घर में सुख व सौभाग्य आता है।
  • यह भी माना जाता है कि कन्यादान करने से माता—पिता को कई हजार गुणा पुण्य,लाभ प्राप्त होता है।
  • कन्यादान के समय वर पूजा का भी विशेष महत्व होता है और बिना वर पूजा के यह रस्म अधूरी मानी जाती है।
  • रस्म में वर की पूजा की जाती है और कुछ धन,सोना आदि देकर कन्या का हाथ वर के हाथ में सौंप दिया जाता है।
  • वर पूजा का महत्व इसलिए भी है कि वर को भगवान विष्णु रूप में माना जाता है और कन्या दान जैसे दान को उत्तम बनाने के लिए ही वर की पूजा की जाती है।

Trending Article