शिव का अंश है रूद्राक्ष, मिलती है सुख-समृद्धि

आध्यात्मिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण माने जाने वाले रूद्राक्ष को भगवान शिव का वरदान माना गया है। ऐसी मान्यता है कि रूद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शंकर की आंखों के जल बिंदु से हुई है। इसे धारण का प्रमुख महत्व यह है कि सकारात्मक उर्जा मिलती है और शिव की कृपा बनी रहती है। रूद्राक्ष भी कई प्रकार के होते है जिनका अलग-अलग महत्व भी बताया गया है। इस बारे में विस्तृत जानकारी से आपको अवगत करा देते है।

  • एकमुखी रूद्राक्ष- यह स्वयं शिव का स्वरूप है।इसमें एक ही आंख अथवा बिंदी को दर्शाया गया है।एक मुखी रूद्राक्ष सुख,मोक्ष और उन्नति प्रदान करता है।
  • द्विमुखी रूद्राक्ष- दो मुखी रूद्राक्ष शिव का अर्धनारीश्वर स्वरूप है।इसे धारण करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति मिलती है।
  • त्रिमुखीरूद्राक्ष- यह अग्नि देवता का प्रतिनिधित्व करता है।यह सूर्य की प्रतिकूलता से उत्पन्न दोषों का निवारण भी करता है और इसे धारण करने से व्यक्ति जन्म जन्मांतर के चक्र से मुक्त हो कर मोक्ष पाता है।
  • चारमुखी रूद्राक्ष- यह रूद्राक्ष धर्म,अर्थ,काम व मोक्ष प्रदान करने वाला होता है।ऐसी मान्यता है कि बुध ग्रह की प्रतिकूलता से उत्पन्न दोषों को यह दूर करता है।
  • पंचमुखी रूद्राक्ष- इस रूद्राक्ष को धारण करने पर मन की शांति मिलती है और गुरू ग्रह की प्रतिकूलता से उत्पन्न दोषों का निवारण करता है।
  • षष्ठमुखी रूद्राक्ष- यह रूद्राक्ष भगवान कार्तिकेय का स्वरूप होता है।इसे धारण करने से पापों की मुक्ति व संतान की प्राप्ति होती है।
  • सप्तमुखी रूद्राक्ष- यह रूद्राक्ष महालक्ष्मी का प्रतिनिधित्व करता है। इसे धारण कर ने से दरिद्रता दूर होती है और संपन्नता,ऐश्वर्य व उन्नति के नए अवसर प्राप्त होते है।जिन लोगों को व्यवसाय में परेशानी आ रही है या घाटा हो चुका है वे लोग इसे धारण कर सकते है।
  • अष्टमुखी रूद्राक्ष- इस रूद्राक्ष के स्वामी भगवान श्री गणेश है।
  • नौमुखी रूद्राक्ष- इस रूद्राक्ष की स्वामी नव दुर्गा है। इसे धारण से व्यक्ति मृत्यु के डर से मुक्त हो जाता है। राहु की प्रतिकूलता से उत्पन्न सभी दोषों का निवारण यह नौमुखी रूद्राक्ष करता है।
  • दसमुखी रूद्राक्ष- यह रूद्राक्ष भगवान विष्णु का प्रतिनिधित्व करताहै।इसे धारण करने पर कर्ज से मुक्ति मिल जाती है और न्यायालय मुकदमों में जीत मिलती है।
  • ग्यारहमुखी रूद्राक्ष- इसे धारण करने पर सभी ग्रहों की प्रतिकूलता से उत्पन्न दोषों का निवाण होता है।
  • ग्यारहमुखी रूद्राक्ष- इसे धारण करने पर सभी ग्रहों की प्रतिकूलता से उत्पन्न दोषों का निवाण होता है।
  • बारहमुखी रूद्राक्ष- इस रूद्राक्ष का प्रतिनिधित्व सूर्य देव को माना गया है।धारण करने पर बुद्वि,तेज,शक्ति जैसे सूर्य देव के गुण प्राप्त होते है।सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए 12 मुखीरूद्राक्ष विशेष लाभकारी होता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भी यह रूद्राक्ष विशेष लाभकारी होता है।
  • तेरहमुखी रूद्राक्ष- मुखी रूद्राक्ष के स्वामी इंद्र देव होते है।इसे धारण करने पर आकर्षण शक्ति व व्यक्तित्व प्राप्त होता है।इस रूद्राक्ष को फिल्म अभिनेता,राजनेता व कारोबारी धारण करते हैं। इसे धारण करने वाले व्यक्ति के प्रति लोगों का आकर्षण व जनाधार धीरे धीरे बढता चला जाता है।
  • चौदहमुखी रूद्राक्ष- इसे स्वयं हनुमान व शिव का रूप माना जाता है।ऐसा माना जाता है कि इसे धारण करने पर संपूर्ण पाप नष्ट हो जाते है।इस रूद्राक्ष को धारण करने पर दुर्घटना,चिंता,कर्ज आदि से मुक्ति मिलती है।यह शनि व मंगल ग्रह दोनों ग्रहों की बाधा से उत्पन्न दोष का निवारण करता है।शनि की साढे साती,ढैया आदि में धारण करने पर राहत मिलती है।
  • पंद्रहमुखी रूद्राक्ष- इसे स्वयं हनुमान व शिव का रूप माना जाता है।ऐसा माना जाता है कि इसे धारण करने पर संपूर्ण पाप नष्ट हो जाते है।इस रूद्राक्ष को धारण करने पर दुर्घटना,चिंता,कर्ज आदि से मुक्ति मिलती है।यह शनि व मंगल ग्रह दोनों ग्रहों की बाधा से उत्पन्न दोष का निवारण करता है।शनि की साढे साती,ढैया आदि में धारण करने पर राहत मिलती है।
  • पंद्रहमुखी रूद्राक्ष- इसे धारण करने पर व्यक्ति को मधुमेह,अस्थमा,हृदय रोग में राहत मिलती है। अपनी परेशानी व समस्या अनुसार इन रूद्राक्षों को चुनकर पहनने से लाभ प्राप्त होता है और विभिन्न परेशानियों से भी छुटकारा मिलता है।

Trending Article