हिन्दू धर्म में हर व्रत,उपवास का अलग महत्व होता है। लेकिन अगर बात करें प्रदोष व्रत की तो यह विशेष फलदायी होता है।
भगवान भोलनाथ की कृपा व सुख,समृद्वि के लिए भक्त को प्रदोष का व्रत करना चाहिए। इस व्रत को रखने से व्यक्ति के जीवन के सभी कष्ट अपने आप दूर होने लग जाते है और हर मनोकामना की पूर्ति होती है। आइए आपको बता दें कि प्रदोष व्रत को रखने के समय किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए और इसका क्या महत्व है।
- प्रत्येक माह के दोनों पक्षों की त्रयोदशी के दिन सांध्यकाल का जो समय होता है उसे प्रदोषकाल कहा जाता है और इस दौरान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए पूजा अर्चना की जाती है।
- शिव जी की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए यह प्रदोष व्रत रखा जाता है।
- इस दिन स्नान आदि के बाद तन व मन की शुद्वता के साथ विधि विधान से भगवान शिव की पूजा अराधना करनी चाहिए।
- इसके लिए शिव मंदिर में जाकर शुद्व जल,दूध,दही,शहद से शिव लिंग पर अभिषेक करना चाहिए।
- इसके बाद चंदन का तिलक,चावल व बेल पत्र चढाने के बाद भोग लगाना चाहिए और ओम नमः शिवाय का 108 बार उच्चारण करना चाहिए और पूजा अर्चना पाठ कर अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।
- खास बात यह है कि जिस दिन प्रदोष व्रत होता है उस दिन के हिसाब से मनुष्य को फल भी मिलता है।
- अगर रविवार को व्रत पडता है तो इसे रवि प्रदोष कहा जाता है और इस दिन व्रत रखने से मनुष्य निरोग रहता है।
- सोमवार के दिन व्रत होने पर सोम प्रदोष कहलाता है और व्रत रखने पर मनुष्य की सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
- मंगलवार को प्रदोष व्रत होने पर रखने से भी रोग से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति स्वस्थ रहता है।
- बुधवार के दिन व्रत होने पर सभी कामनाओं की पूर्ति होती है और गुरूवार को प्रदोष होने पर शत्रु का नाश होता है।
- शुक्रवार के दिन व्रत पडने पर रखे जाने पर सौभाग्य की वृद्वि होती है।
- शनिवार के दिन प्रदोष व्रत रखे जाने पर पुत्र की प्राप्ति होती है।
- इस प्रकार अलग-अलग दिन व्रत पडने पर विधि विधान पूर्वक सच्ची श्रद्वा के साथ कोई अगर शिव भक्त इन व्रतों को रखेगा तो उसकी मनोकामनाओं की पूर्ति होगी।
- इस व्रत में व्रती को निर्जल रहकर व्रत रखना होता है।
- व्रत के दिन शिव का ज्यादा से ज्यादा ध्यान करें और शांत चित्त के साथ प्रसन्न भी रहें।
- इस तरह व्रत रखने पर भक्त पर भोले की अवश्य कृपा होगी और मनोकामना पूरी होगी।