दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा पर्व मनाया जाता है जिसका काफी महत्व माना गया है। इसे अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन गौ धन यानि गायों की पूजा की जाती है। यह पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को मनाया जाता है।
| तिथि | 8 नवंबर, गुरूवार |
| गोवर्धन पूजा प्रातःकाल मुहूर्त | 06:02 से 08:17 |
| गोवर्धन पूजा सायंकाल मुहूर्त | 15:03 से 17:19 |
क्या है महत्व—हिन्दू धर्म में गाय को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। इसलिए गौ के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन गाय व गोवर्धन की पूजा की जाती है।
उंगली पर कृष्ण ने उठाया था गोवर्धन पर्वत— मान्यताओं के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने ब्रजवासियों को मूसलाधार वर्षा से बचाने के लिए सात दिन तक गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी उॅंगली पर उठा कर रखा जिससे सभी ब्रजवासी इसकी छाया में बर्षा से बचे रहे और सात दिन बाद देवराज इंद्र का अहंकार टूटने के बाद गोवर्धन पर्वत को नीचे रखा और हर वर्ष गोवर्धन पूजा करके अन्नकुट उत्सव मनाने की आज्ञा दी। तभी से यह अन्नकुट उत्सव के नाम से मनाए जाने लगा है।
इंद्र का अभिमान हो गया चूर- चूंकि इन्द्र ने अभिमान चूर होने के बाद श्री कृष्ण से क्षमा मांगी थी इसलिए कृष्ण ने क्षमा कर इंद्र की पूजा को भी गोवर्धन पूजा में मान्यता दे दी और इंद्र की पूजा भी की जाने लगी।
अन्नकुट का प्रसाद— इस दिन गोवर्धन पूजा के समय अन्नकुट का प्रसाद बना कर भोग लगाया जाता है। अन्नकुट बनाने में कई तरह की सब्जियां,दूध व मावे से बने मिष्ठान का प्रयोग किया जाता है।
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