भारत में मकर संक्रांति प्रमुख माने जाने वाला पर्व है। मान्यता है कि इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। शरद ऋतु जाने लगती है और बसंत ऋतु का आगमन शुरू हो जाता है जिससे दिन लंबे होने लगते हैं और रातें छोटी हो जाती है।
| तिथि | समय |
|---|---|
| पुण्य काल मुहूर्त | 06:34 से 12:06 |
| अवधि | 5 घंटे 31 मिनट |
| महापुण्य काल मुहूर्त | 06:34 से 08:25 |
| अवधि | समय 1 घंटे 50 मिनट |
मकर संक्रांति का बड़ा ही महत्व है। मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं। शनि मकर व कुंभ राशि का स्वामी है। इस पर्व को पिता-पुत्र के अनोखे मिलन से भी जोडकर माना जाता है। मान्यता यह भी है कि मकर संक्रांति के दिन ही भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक पर असुरों का संहार कर उनके सिरों को काटकर मंदरा पर्वत पर रख दिया था। तभी से भगवान विष्णु की इस जीत को मकर संक्रांति पर्व के तौर पर मनाया जाने लगा।
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