मकर संक्रांति

भारत में मकर संक्रांति प्रमुख माने जाने वाला पर्व है। मान्यता है कि इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। शरद ऋतु जाने लगती है और बसंत ऋतु का आगमन शुरू हो जाता है जिससे दिन लंबे होने लगते हैं और रातें छोटी हो जाती है।

मकर संक्रांति

15 जनवरी, मंगलवार 2019

तिथि समय
पुण्य काल मुहूर्त 06:34 से 12:06
अवधि 5 घंटे 31 मिनट
महापुण्य काल मुहूर्त 06:34 से 08:25
अवधि समय 1 घंटे 50 मिनट

मकर संक्रांति का महत्व

मकर संक्रांति का बड़ा ही महत्व है। मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं। शनि मकर व कुंभ राशि का स्वामी है। इस पर्व को पिता-पुत्र के अनोखे मिलन से भी जोडकर माना जाता है। मान्यता यह भी है कि मकर संक्रांति के दिन ही भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक पर असुरों का संहार कर उनके सिरों को काटकर मंदरा पर्वत पर रख दिया था। तभी से भगवान विष्णु की इस जीत को मकर संक्रांति पर्व के तौर पर मनाया जाने लगा।

  • इस त्यौहार को सकारात्मकता का प्रतीक भी माना जाता है।
  • इस दिन सूर्यदेव की विशेष पूजा,अराधना लोगों द्वारा की जाती है।
  • वही जप,तप,दान,स्नान आदि धार्मिक क्रियाओं का विशेष महत्व माना गया है और ​कहा जाता है कि इस दिन किया गया दान सौ गुणा बढ कर पुन: प्राप्त हो जाता है।
  • मकर संक्रान्ति के दिन गंगा स्नान व गंगा तट पर किया गया दान भी अत्यंत शुभ माना गया है।
  • भारत के अलग—अलग प्रान्तों में इस त्योहार को विभिन्न रूपों में मनाया जाता है। तमिलनाडू में इस त्यौहार को पोंगल के रूप में मनाया जाता है।
  • मकर संक्रान्ति के त्यौहार को फसलों व किसानों के त्यौहार के नाम से भी पुकारा जाता है क्यों कि इस दिन किसान अच्छी फसल के लिए सूर्य देव भगवान को धन्यवाद देकर हमेशा लोगों पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।

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