बेडरूम़ से जुड़े ये 10 वास्तु उपाय घर में ढेरों खुशियां लाए

अक्सर हम यह देखते होंगे कि बहुत प्रयास करने के बावजूद भी परिवार को सारे सुख-समृद्धि की चीजें उपलब्ध कराने के बाद भी आपस में तालमेल की कमी रहती है। बहुत ज्यादा वाद-विवाद रहता है व आपसी सामंजस्य नहीं बैठ पाता है। परिजनों में बहुत ज्यादा तनाव रहने से मन हमेशा अशांत रहता है। वास्तु शास्त्र में ऐसी बहुत सारी मान्यता है कि हमारे आसपास का जो वातावरण है वो एक अनंत स्रोत है ऊर्जा का, यह सकारात्मक भी होती है और नकारात्मक भी होती है। यानि किसी भी भवन में दोनों प्रकार की ऊर्जा का उचित तालमेल ही वास्तु शास्त्र कहा जाता है। आपसी रिश्तें हो या दापंत्य जीवन, भाई-भाई के संबंध हो या सास-बहू के बीच के रिश्तें इस ऊर्जा से जीवन का हर पहलू प्रभावित होता है। शयनकक्ष हमारे घर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, क्योंकि यहीं हम आराम करते हैं और अपने जीवन से जुड़े निजी अनुभव शेयर करते हैं। देखा जाए तो हमारे जीवन का एक बहुत बड़ा समय इसी स्थान पर सोते हुए गुजरता है।

  • वास्तु शास्त्र में घर के दक्षिण-पश्चिम दिशा आपसी रिश्तों के लिए सक्रिय माना जाता है।
  • सोते समय अपना सिर पूर्व या दक्षिण की ओर रखना चाहिए।
  • दीवार के साथ कभी अपना बिस्तर ना लगाएं, इससे रिश्तों में कटुता आती है।
  • बिस्तर को खिड़की से सटाकर ना रखें, इससे रिश्तों में तनाव उत्पन्न होता है।
  • नवदंपत्ति के लिए हमेशा बिस्तर नया होना चाहिए।
  • कोशिश करें कि पलंग के नीचे सामान ना रखें व इस हिस्से को खाली रखें। ऐसा करने से साकारात्मक ऊर्जा का संचार बिस्तर के चारो तरफ होता है।
  • बिस्तर के सामने कभी शीशा ना लगाएं, इससे संबंधों में दरार आती है और आप अनिद्रा के भी शिकार हो सकते हैं।
  • शयनकक्ष के मुख्य द्वार पर शाम के समय थोड़ा सा कपूर जलाना चाहिए, जिससे वहां की नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकल जाती है।
  • शयनकक्ष में टीवी, फ्रिज या कंप्यूटर ना रखें, हानिकारक तरंगे शरीर पर दुष्प्रभाव डालती हैं।
  • अगर जगह की कमी की वजह से शयनकक्ष में ही पूजा घर हो तो रात को सोते समय भगवान की मूर्तियों के सामने पर्दा लगा दें।

यह कुछ उपाय हैं जिससे कुछ चीजों को इधर से उधर करके आप अपने परिवार के तनाव व वैमनस्य को दूर कर सकते हैं। परिवार में सुख-शांति व समृद्धि की स्थापना कर सकते हैं और आपसी संबंधों को सुधार सकते हैं।

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