ज्योतिष शास्त्र द्वारा यह भी पता किया जा सकता है कि आपकी शादी से पहले परिवारजनों व बाद में उनके साथ व ससुरालजनों के साथ कैसा व्यवहार व मधुर संबंध रहेंगे या नहीं। आइए आपको इस बारे में जरूरी जानकारी से रूबरू करा देते है।
- ज्योतिष के अनुसार कुंडली का प्रथम भाव स्वयं व्यक्ति से ही संबंधित होता है औरे इस भाव के पीड़ित होने से व्यक्ति परेशान रहता है और स्वयं को परेशानियों में उलझा लेता है।
- दूसरा भाव व्यक्ति के परिवार से संबंधित माना जाता है और जिनका द्वितीय भाव पीड़ित होता है उन्हें परिवार से समस्याएं मिलती हैं और यहां तक की घर में क्लेश का माहौल रहता है।
- अगर तीसरे भाव में अशुभ ग्रह है तो भाई—बहनों की ओर से परेशानियां रहती हैं।
- चौथा भाव माता का माना जाता है और इस भाव के पीडित होने पर व्यक्ति की माता का स्वास्थ्य खराब रहता है।
- पांचवा घर संतान का माना गया है और अगर यह घर पीडित है तो संतान पक्ष से सुख नहीं मिलेगा और प्रेम संबंध में भी सफलता नहीं मिलती है।
- जीवन में सबसे महत्वपूर्ण वैवाहिक जिन्दगी का भाव सातवा होता है और अगर यह भाव दूषित है या अशुभ ग्रह बैठे हैं तो पति—पत्नी में झगडे व अशांति का माहौल बना रहता है।
- आठवां घर ससुराल वालों से संबंधित माना गया है और इस घर के पीडित होने पर व्यक्ति को ससुराल पक्ष की तरफ से कष्ट मिलता है और जातक के संबंध अच्छे नहीं रहते हैं।
- दसवां भाव पिता का माना जाता है इसमें ग्रह ठीक नहीं होने पर पिता से संबंध या पिता का स्वास्थ्य अच्छा नहीं रहता है।
- इन भावों में बैठे अशुभ ग्रहों के उपाय व शांत कर रिश्तों,संबंधों को सुधारा जा सकता है।