काल के भी काल कहे जाने वाले भगवान महाकाल यानि महादेव का प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर मध्यप्रदेश के उज्जैन नगर में स्थित है। महाकाल को उज्जैन का राजा भी कहा गया है। लेकिन क्या आपको पता है कि इस मंदिर में विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती होती है और इसका विशेष महत्व होता है। कहा जाता है कि इस आरती में शामिल होकर महाकाल के दर्शन करने से मोक्ष व पुण्य मिलता है। आइए, आपको विश्व में सिर्फ एक जगह उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली इस भस्म आरती के रहस्यों के बारे में विस्तार से बता देते हैं।
- भगवान महादेव का महाकाल स्वरूप शिवलिंग पूरे विश्व में सिर्फ उज्जैन में ही स्थित है।
- हर रोज सुबह चार बजे की जाने वाली भस्म आरती दिन में होने वाली अन्य आरतियों में अपना विशेष महत्व रखती है।
- इस आरती में महाकाल के दर्शन व भाग लेने के लिए देश, विदेश से दूर—दूर से लोग शामिल होने आते हैं।
- सुबह की भस्म आरती में शामिल होने के लिए रात करीब दो बजे ही श्रद्धालुओं की लाइन लगना शुरू हो जाती है।
- एक महीने पहले ऑनलाइन इंटरनेट पर रिजर्वेशन भी होता है।
- इस आरती में शामिल होने वाली महिलाओं के लिए कुछ खास नियम बनाए गए है जिनका पालन करना अनिवार्य होता है।
- दरअसल महिलाओं को आरती में भाग लेने के दौरान घूंघट करने के लिए कहा जाता है। क्यों कि शिवलिंग पर भस्म चढाने के दौरान महाकाल निराकार स्वरूप में होते हैं और इस स्वरूप के दर्शन करने की महिलाओं को अनुमति नहीं होती है।
- पुरूषों को इस आरती में शामिल होने के लिए धोती पहनना अनिवार्य होता है।
- आरती के दौरान महाकाल के तीन स्वरूप के दर्शन होते हैं।
- मंदिर के पुजारियों द्वारा अग्नि से भस्म तैयार की चढाई जाती हैं।
- कहा जाता है कि पुराने समय में चिता की भस्म लाकर यहां चढाई जाती रही है।
- मान्यता है कि इस आरती में शामिल होने और महाकाल के दर्शन करने से मोक्ष व विशेष पुण्य मिलता है और जीवन के सभी दोष, संकट दूर हो जाते है व मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती है।
- पौराणिक मान्यता है कि प्राचीन काल में दूषण नामक राक्षस की वजह से उज्जैन में हर कोई परेशान था तब शिवजी ने महाकाल रूवरूप में आकर राक्षस का वध किया
- बाद में शिवजी ने राक्षस की भस्म से अपना श्रृंगार किया और उज्जैनवासियों के आग्रह पर यही महाकाल शिवलिंग रूप में बस गए और भस्म आरती शुरू हुई।