हिन्दू मान्यताओं के अनुसार मलमास ऐसा समय होता है जिसमें शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है । इस दौरान मांगलिक कार्य नहीं होते हैं । आइए, आपको बता दें
कि इस मास में क्या क्या कार्य नहीं करना चाहिए और इस मास का क्या महत्व है ।
- जिस माह में सूर्य संक्रान्ति नहीं होती है उसे अधिक मास कहा जाता है ।
- इसके अलावा वर्ष के जिस महीने में दो सूर्य संक्रान्ति होती हैं वह क्षय मास कहलाता है ।
- मान्यता है कि इन महीनों में गृह प्रवेश, शादी - ब्याह आदि कोई भी नया मांगलिक,शुभकार्य संपन्नन हीं होता है ।
- कहा जाता है कि इस दौरान नए कार्य तो शुरू नहीं किए जा सकते हैं लेकिन धर्म व पुण्य कर्म अवश्य किए जाने चाहिए।
- इस समय में तीर्थ यात्रा पर जाना भी सफल होता है ।
- मलमास के दौरान भगवान शिवकी अराधना का विशेष फल मिलता है और भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करना भी उत्तम रहेगा ।
- इसके अलावा श्री मद भागवत गीता,श्री राम अराधना व कथा वाचन करने से भी लाभ मिलता है।
- शास्त्रों के मुताबिक हर तीसरे साल में सर्वोत्तम यानि पुरूषोत्तम मास की उत्पत्ति होती है ।
- इस मास में अगर दान,धर्म,पूजन,व्रत व उपवास किए जाए तो पाप नष्ट होकर कई गुणा पुण्य फल प्राप्त होता है ।
- मल मास में भूमि पर सोना भी अच्छा माना जाता है ।
- इस माह में विवाह वर्जित होता है और अगर ऐसी गलती करते हैं तो शादी शुदा जिन्दगी में परेशानियां आएंगी ।
- नया बिजनेस करने पर आर्थिक समस्याएं आएंगी ।
- नई भूमि या मकान खरीदना भी गलत फैसला हो सकता है और आगे चलकर इस मामले में मुसीबतें आ सकती हैं ।
- इन प्रमुख बातों व सावधानियों का ध्यान रख कर मलमास में भी पुण्य फल कमाया जा सकता है ।