श्राद्ध को कनागत भी कहा जाता है।
इनकी अवधि ज्यादातर 15 दिन की होती है।
ऐसा माना जाता है कि श्राद्ध कर अपने पितरों को मृत्यु चक्र से मुक्त कर उन्हें मोक्ष प्राप्त करवाने में मदद करता है।
वर्तमान पीढी श्राद्धकर अपने पूर्वजों के प्रति ऋण चुकाती है । श्राद्धके दौरान किन किन जरूरी बातों का प्रमुख रूप से ध्यान दिया
जाना चाहिए यह बता देते हैं।
- श्राद्ध के अनुष्ठान को बडे बेटे या परिवार के बडे पुरूष सदस्य द्वारा ही किया जाता है ।
- श्राद्ध के दिन सुबह जल्दी उठ कर स्नान आदि निवृत्त हो कर शुद्व हो ले और श्राद्ध के कार्य में लग जाए ।
- घर में बनाए गए निर्धारित स्थान पर पूर्वजों को भोग लगाएं ।
- भोग के बाद आमंत्रित किए गए ब्राह्मणों को घर आदर सहित बुलाकर बैठाते हुए भोजन करवाएं।
- भोजन के बाद ब्राह्मणों को नए कपडे,फल,मिठाई व दक्षिणा जरूर दान करें ।
- इस तरह आदर सत्कार सहित भोजन कराने व दक्षिणा देने से पूर्वज संतुष्ट हो जाते है ।
- बाद में किसी गरीब व्यक्ति को भोजन खिलाना चाहिए इससे पुण्य मिलेगा ।
- अगर इस तरह हम श्राद्धकरते हैं तो पूर्वज संतुष्ट रहेंगे और हमारे जीवन की परेशानियों व अडचनों को दूर करेंगे ।
- काशी,गया,प्रयाग,रामेश्वर आदि जगहों पर किया गया श्राद्व विशेष फलदायी रहता है ।