हिन्दू धर्म का विशेष पर्व कृष्ण जन्माष्टमी का अलग महत्व है। इस दिन त्यौहार पर पूरे भारत के मंदिरों में भव्य तरीके से कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। लेकिन कृष्ण की जन्मभूमि यानी मथुरा में श्री कृष्ण जन्माष्टमी विश्व प्रसिद्ध है और यहां बडा आयोजन होता है जिसे देखने देश के साथ विदेश से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
मुहूर्त-
| तिथि |
समय |
| निशिता पूजा समय |
23:57 से 24:43 |
| रोहिणी समाप्त |
20:05 |
| अष्टमी तिथि आरंभ |
2 सितंबर 20:47 |
| अष्टमी तिथि समाप्त |
3 सितंबर 19:19 |
- इस दिन मथुरा, वृंदावन समेत पूरे देश में भगवान श्री कृष्ण और राधा की सुंदर मनमोहक झांकियां सजाई जाती हैं।
- मथुरा में जन्माष्टमी की शाम से ही भक्त ढोल, नगाड़े, झांझ मजीरे से भजन, संकीर्तन करते हुए दिखाई देखे जा सकते हैं।
- देश,विदेश में भगवान श्री कृष्ण की नगरी मथुरा हमेशा पूजनीय व दर्शनीय रही है।
- मथुरा में गर्भगृह,केशव मंदिर,दर्शन मंडप आदि प्रमुख स्थान हैं।
- श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर मथुरा के मंदिरों में रोशनी के खास इंतजाम किए जाते हैं। पूरे मथुरा को इस दिन दुल्हन की तरह सजाया जाता है। इस रोशनी को देख कर श्रद्धालु आकर्षित होते हैं।
- जन्माष्टमी के खास मौके पर भगवान के दर्शनों के लिए इस दिन लाखों लोग मथुरा पहुंचते हैं और रात को दर्शन कर शांति व समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।
- मथुरा में कृष्ण के साथ ही कई देवी—देवताओं के मंदिर स्थित हैं और पास में ही वृंदावन,गोकुल,गोवर्धन भी है।
- जन्माष्टमी के मौके पर जाने वाले श्रद्धालु इस दिन मथुरा के साथ वृंदावन,गोकुल व गोवर्धन भी जाकर भगवान के दर्शन पाकर भक्ति में डूब जाते है।