ग्रहों की चाल पर टिकी होती है प्यार की दुनिया

जीवन की युवा अवस्था एक ऐसा पडाव होती है जहां आकर हर कोई प्यार के इस संमदर में डूबकी लगाने पर मजबूर हो ही जाता है। प्यार की इस सुंदर दुनिया में जहां कोई किसी के साथ विवाह बंधन में बंधकर जीवन भर एक दूसरे के लिए हो जाते हैं तो किसी की लव स्टोरी कुछ दिन या महीनों बाद बुरे अंत के साथ खत्म हो जाती है। लेकिन क्या आपको पता है कि लव रिलेशनशिप में जन्म कुंडली के ग्रहों की स्थिति प्रमुख रूप से भूमिका निभाती है। आइए,आप भी जान लें कि किन ग्रहों की स्थिति प्यार को पास या दूर ले जाती है।

शुक्र — जन्म कुंडली में प्यार का पूरा मामला शु​क्र, मंगल व चंद्र ग्रह की स्थिति पर निर्भर करता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार शुक्र प्रेम का प्रधान ग्रह माना गया है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शुक्र मजबूत है तो पक्का है कि प्यार के रिश्ते बनेंगे। अगर शुक्र के साथ मंगल व राहु का सही योग बने तो व्यक्ति के लव रिलेशनशिप आगे बढ कर सभी हदों को पार कर जाते हैं। लेकिन विवाह ज्यादा दिनों तक नहीं टिक पाता।

चंद्रमा— ग्रहों के साथ ही कुंडली के घर भी प्रेम के मामले में अपनी भूमिका निभाते हैं। जन्म कुंडली के पांचवे व सांतवे घर व्यक्ति के प्रेम पक्ष को दर्शाते हैं। अगर सातवें भाव में उच्च का चंद्रमा है तो व्यक्ति का प्रेम संबंध मजबूत होता है और ऐसे जातक के जीवन में कई प्रेम संबंध भी बनते हैं।

  • शुक्र व चंद्रमा का मिलन भी प्रेम संबंधों को आगे ले जाने वाला होता है।
  • शुक्र ग्रह से मन की प्रेम तरंगे पैदा होती है लेकिन अगर कुंडली में शुक्र अस्त या निर्बल है तो ऐसी भावनाएं भी कमजोर हो जाती हैं।
  • राहु के साथ अगर शुक्र का योग बने तो प्रेम के मामले में नकारात्मक चीजें सामने आती हैं।
  • सूर्य के साथ अगर शुक्र का योग बने तो दांपत्य जीवन प्रभावित होता है।
  • इस तरह कुंडली में इन ग्रहों की स्थिति जानकर लव रिलेशनशिप के बारे में पता लगा सकते हैं।

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