शादी के पवित्र बंधन में जुडने से पहले पति-पत्नी फेरे के समय एक दूसरे का जिन्दगी भर साथ निभाने का वचन लेते है। मगर कई मामलों में शादी के कुछ दिनों बाद ऐसी परिस्थितियां बनने लग जाती है कि एक दिन दोनों को अलग हो कर तलाक लेना पड जाता है लेकिन इसके लिए पति-पत्नी के अलावा उनके ग्रहों को जिम्मेदार माना जाता है। आइए देखें,कौनसे ग्रहों की वजह से इस मधुर रिश्ते में अलगाव व पुनर्विवाह की स्थितियां बनने लग जाती है।
- राहु- जन्म कुंडली में सप्तम स्थान महत्वपूर्ण होता है और इस भाव की स्थिति को देख कर ही पति व पत्नी की कुंडली में रिश्ते का अंदाजा लगाया जा सकता है। कुंडली में राहु अगर सप्तम स्थान में बैठा है तो पत्नी से दूर करेगा क्यों कि अक्सर राहु रिश्ते में अलगाव पैदा करता है और रिश्ते टूटने व पुनर्विवाह के लिए यह ग्रह जिम्मेदार माना जाता है। शादीशुदा जीवन में बुद्वि भ्रमित करने का कार्य भी राहु ही करता है और व्यक्ति गलत फैसले ले बैठता है।
- सूर्य- सप्तम स्थान में अगर सूर्य होगा तो भी पति-पत्नी के दूर,अलग होने की संभावना बनी रहती है।
- मंगल दोष-अगर पति-पत्नी में से कोई एक मांगलिक है तो भी संबंध विच्छेद व पुनर्विवाह की स्थिति बन जाती है।
- गुरू-यदि पत्नी का कुंडली में गुरू खराब स्थिति में है तो शादी के बाद परेशानियां आती है और रिश्ते में कलह,तनाव व अलग होने की भी परिस्थितियां पैदा हो जाती है।
- उपाय-ज्योतिष में जहां पति-पत्नी के अलग होने व पुर्नविवाह को लेकर ग्रह स्थिति का वर्णन है तो वहीं कुछ आवश्यक उपाय करके काफी हद तक ऐसी समस्याओं का समाधान भी किया जा सकता है।
- अगर पत्नी का कुंडली में गुरू खराब है तो पत्नी बृहस्पति वार का व्रत रखें और विष्णु भगवान की पूजा अर्चना व विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ कर सकती है।
- शादी से पहले वर व वधु दोनों की कुंडलियो को किसी अनुभवी ज्योतिषी से दिखाकर मंगल दोष का अध्ययन करवा लेना चाहिए।
- शादीशुदा जिन्दगी में पति के लिए शुक्र ग्रह सुख शांति का कारक होता है इसलिए पति को शुक्र ग्रह को मजबूत करने के लिए उपाय कर लेने चाहिए जिससे पति व पत्नी के बीच मधुरता बनी रहे।
- घर में वास्तु उपाय करके भी अलग व तलाक की स्थिति को टाला जा सकता है।