इस तरह बनता है इंजीनियरिंग में सफलता का योग

पुराने पिछले कुछ वर्षो में करियर को लेकर सीमित विकल्प युवाओं के पास होते थे लेकिन आज के जमाने में करियर के हर क्षेत्र में काफी संभावनाएं है। आज भी ज्यादातर युवा इंजीनियरिंग फील्ड की तरफ आ​कर्षित रहते हैं लेकिन ज्योतिषीय कुछ तथ्यों का अध्ययन व उपाय कर इंजीनियरिंग क्षेत्र में आगे बढा जा सकता है।

शनि ग्रह की स्थिति- कुंडली में यदि शनि ग्रह बलवान होकर लग्न, दशम या दशमेश को प्रभावित करें तो जातक का इंजिनियर बनने का योग बन जाता है।

मंगल-राहु स्थिति- मंगल और राहु का योग केन्द्र या त्रिकोंण में यदि हो तो भी विधार्थी का इंजीनियर बनने का योग बन जाता है।

  • ज्योतिष अनुसार जिस व्यक्ति की कुंडली में शनि का प्रभाव होता है वह दिमागी और मानसिक रूप से मजबूत होता हैं और गणितीय पहेलियों को सुलझाना उनके लिए काफी आसान होता है।
  • इस परिस्थिति में व्यक्ति इंजीनियरिंग सेवा में जाकर सफलता हासिल कर सकता है।
  • जन्म कुंडली में यदि शनि की मंगल पर दृष्टि और मंगल की शनि पर दृष्टि पड रही हो तो जातक का सिविल इंजीनियर का योग बनता है ।
  • इसके अलावा अगर किसी विधार्थी की कुंडली में इंजीनियर बनने का योग नहीं बन रहा है और बनने में कोई अडचन आ रही है तो संबंधित ग्रहों के उपाय कर मजबूत कर योग बनाय जा सकता है जिससे सफलता मिलने की संभावना बनती है।
  • घर में अध्ययन कक्ष में वास्तु नियमों का पालन कर भी इंजीनियरिंग सेवा परीक्षाओं में सफलता हासिल की जा सकती है।

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