स्त्री की जन्म कुंडली में सप्तम भाव क्यों है महत्वपूर्ण

किसी स्त्री की जन्म कुंडली में सप्तम भाव ज्योतिषीय दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। क्यों कि कुंडली में सप्तम भाव विवाह व विवाह के बाद पति व पत्नी के बीच जीवन के विभिन्न पहलुओं से संबंधित होता है। आइए,आपको कुंडली के इस भाव के बारे में विस्तार से जानकारी दे देते हैं।

  • अगर किसी स्त्री की कुंडली के सप्तम भाव में चंद्रमा हो तो स्त्री का स्वभाव मधुर होता है। यदि इस भाव में चंद्रमा वृषभ राषि में हो तो महिला सुंदर होती है और वस्त्र,आभूषण पहनने का शौक होता है।
  • यदि किसी स्त्री की जन्म कुंडली के सप्तम भाव में मंगल हो तो भाग्य उसका साथ नहीं देता है और बुरे लोगों की संगत में रहने वाली होती है।
  • यदि स्त्री के सप्तम भाव में सूर्य हो तो वह बुरे स्वभाव की होती है। हमेशा लडने के लिए तैयार रहने वाली होती है।
  • महिला की कुंडली के सप्तम भाव में अगर बुध हो तो वह मिलनसार होती है और बोलचाल की भाषा भी मधुर ही होती है जिससे वह पति को प्रिय होती है।
  • सप्तम स्थान में गुरु ग्रह होने पर स्त्री पतिव्रता,धनवान,गुणों वाली होती है।
  • इस स्थान में शुक्र होने पर स्त्री को धनवान,सुंदर पति मिलता है।
  • सप्तम स्थान में शनि होने पर पति रोगी,दरिद्र होता है और उच्च का शनि हो तो पति धनवान,गुणवान होता है।
  • लेकिन अगर कुंडली के सप्तम भाव में राहु या केतु हो तो स्त्री के जीवन में दुख रहता है और पति सुख से वंचित भी रहती है। महिला का स्वभाव भी ठीक नहीं होता है और किसी से नहीं बनती है।
  • महिला के अलावा पुरूष का सप्तम भाव भी विवाह व उसके बाद जिंदगी के बारे में बताता है।
  • स्त्री की जन्म कुंडली में सप्तम भाव से उसके ससुराल की दूरी के बारे में भी अंदाजा लगाया जा सकता है।
  • अगर सप्तम भाव में वृष,सिंह,वृश्चिक या कुंभ राशि स्थित हो तो लडकी की शादी उसके जन्म स्थान से 90 किलोमीटर के अंदर ही होगी।
  • यदि सप्तम भाव में चंद्र,शुक्रव गुरू हो तो लडकी का विवाह उसके जन्म स्थान के समीप ही होगा।
  • सप्तमेष सप्तम भाव से द्वादष भाव के मध्य हो तो विवाह विदेश में होगा या फिर लडका शादी के बाद लडकी को साथ लेकर विदेश चला जाएगा।
  • यदि किसी लडकी की कुंडली में बुध स्वराषि मिथुन व कन्या का होकर सप्तम भाव में बैठा हो तो विवाह बाल्यावस्था में ही होगा।
  • चंद्रमा अगर सप्तमेष होकर पापी ग्रह से प्रभावित हो तो विवाह 22 वर्ष की आयु में होगा।
  • ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर सप्तम भाव में या सप्तम भाव पर चंद्रमा,बुध,गुरू या शुक्र का प्रभाव हो तो लडकी का पति लगभग दो से चार वर्ष के अंतर से बडा होगा और सुंदर भी होगा।
  • लेकिन अगर इस भाव में या भाव पर सूर्य,मंगल,शनि,राहु व केतु का प्रभाव हो तो बडी आयु या लडकी की उम्र से 5 वर्ष बडा होगा।
  • इसके अलावा लडकी की शादी के वक्त जन्म कुंडली में अनुभवी ज्योतिषी से यह भी दिखवा लेना चाहिए कि सप्तम भाव का स्वामी खराब है या सही है। सप्तम भाव पर किसी अन्य पाप ग्रह की दृष्टि तो नहीं है। कोई पाप ग्रह सप्तम में बैठा तो नहीं है। इन प्रमुख तथ्यों का लडकी की कुंडली में अध्ययन करवा कर विवाह व उसके बाद की जिंदगी के बारे में काफी जानकारी हासिल की जा सकती है और नकारात्मक प्रभाव होने पर दोष से संबंधित उपाय किए जा सकते हैं।

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