अगर शादी के बाद आए दिन पति-पत्नी में रोजाना झगडे,तनाव की स्थिति बन रही तो यह वैवाहिक जीवन नरक के समान प्रतीत होता है। मगर इसके लिए ग्रहों की स्थिति प्रमुख रूप से जिम्मेदार मानी जाती है।
गुरू ग्रह का प्रभाव-शादीशुदा जिन्दगी में सुख,शांति बनाए रखने में गुरू ग्रह की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अगर पत्नी की कुंडली में गुरू शुभ स्थिति में है तो पूरी जिन्दगी खुशहाल बनी रहेगी और संतान की प्राप्ति भी समय पर होगी। इसके विपरीत अगर पत्नी की कुंडली में बृहस्पति ग्रह की स्थिति सही नहीं है और किसी पापी ग्रह की दृष्टि पड रही तो दोनों के जीवन में आए दिन झगडे,तनाव बना रहेगा और संतान प्राप्ति में भी बाधाएं आएंगी। इतना ही नहीं कुंवारी कन्या के विवाह में भी गुरू ग्रह का महत्वपूर्ण योगदान होता है। अगर गुरू खराब है तो कन्या की शादी होने में बहुत ज्यादा विलंब होगा और अडचने आएंगी। कुछ आवश्यक उपाय करके परेशानियों से छुटकारा पाया जा सकता है।
शुक्र ग्रह की भूमिका-शादी के बाद वैवाहिक जीवन में सुख होने या नहीं होने की परिस्थितियां कुंडली में मौजूद शुक्र ग्रह के उपर निर्भर करती हैं। अगर पति की कुंडली में शुक्र ग्रह शुभ स्थिति में है तो शादीशुदा जिन्दगी में खुशियां बनी रहेंगी लेकिन अगर शुक्र खराब है या किसी पापी ग्रह की दृष्टि है तो फिर जिन्दगी भर मुश्किलों का सामना करना ही पडेगा। मगर शुक्र ग्रह के उपाय करके इन समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है।
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